Saturday, April 25, 2020

प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल होने के 10 क़दम



आज के आपाधापी भरे जीवन में एक अच्छे करियर की तलाश, अभिभावकों की उम्मीदें, और अपनी महत्वाकांक्षाएं- इन सबको पूरा करने के लिए ज़रूरी है एक ऐसा फॉर्मेट तैयार करना, जिससे आप न केवल प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल हो सकें, बल्कि कड़ी स्पर्धा के बावजूद अपने लिए अपनी योग्यतानुसार एक सुनहरा भविष्य संजो सकें. तो फिर देर किस बात की. आइए, पहले एक फॉर्मेट तैयार करते हैं कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा के लिए

किन-किन बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है.

1. लक्ष्य निर्धारणः सबसे पहले आप अपना लक्ष्य निर्धारित करें कि आपको क्या बनना है, सफलता आपको किस क्षेत्र में चाहिए और क्या आप उस क्षेत्र में मील का पत्थर साबित हो पाएंगे? हमारे एक परिचित हैं, जिन्होंने पहले इंजीनियरिंग की, कुछ साल जॉब किया और फिर एमबीए किया, उसके बाद बैंक में जॉब कर रहे हैं. उन्होंने अपनी योग्यता का झंडा हर जगह फहराया, पर सवाल ये है कि अगर आपका रुझान उस ओर नहीं है, तो वो दिशा आप न चुनें. दिशा वो चुनें, जिसमें आपका रुझान हो, जिसमें आपकी योग्यता हो, आप निश्‍चित रूप से उसमें सफलता प्राप्त करेंगे और यकीन मानिए आप भविष्य में अपने काम का आनंद भी ले पाएंगे.

2. आत्मविश्‍वास, दृढ़ इच्छाशक्ति व धैर्यः किसी भी कार्य की सफलता तब तक निर्धारित नहीं की जा सकती, जब तक कि आपमें आत्मविश्‍वास न हो. इसलिए ज़रूरी है अपने अंदर के विश्‍वास को डिगने न देना. ख़ुद को स्वयं ही प्रोत्साहित करना, परंतु यहां ये कहना भी ज़रूरी है कि कभी भी किसी भ्रम या छलावे में न रहें. ओवर कॉन्फिडेंस यानी अति आत्मविश्‍वास से बचें. समय-समय पर अपना सही आंकलन करें. यदि आपने अपना सही समय पर सही आंकलन किया, तो आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता. आपका आत्मविश्‍वास ही आपके अंदर प्रबल इच्छा उत्पन्न करेगा, जो आपकी योजनाओं को सफल होने में मदद करेंगी. लेकिन इसके साथ ही यह भी ज़रूरी है कि धैर्य से एकजुट हो अपने कार्य में लगे रहे. इस प्रकार लयबद्ध तरी़के और सही योजना अपनाने पर क़ामयाबी आपके क़दम चूमेगी.

3. परीक्षा के विषय में पूरी जानकारीः लक्ष्य निर्धारित होने और आत्मविश्‍वास के पुख़्ता हो जाने पर ज़रूरी है, जिस प्रतियोगिता में आप शामिल होना चाहते हैं उसके विषय में पूरी जानकारी ख़ुद इकट्ठा करना, जैसे- परीक्षा का समय, उसके फॉर्म भरने की तारीख़, वांछनीय योग्यता, न्यूनतम मार्क्स, न्यूनतम-अधिकतम उम्र सीमा,

परीक्षा से संबंधित सारी पठन सामग्री (जैसे- जनरल नॉलेज, करंट अफेयर्स, मानसिक योग्यता, सामान्य हिंदी या अंग्रेज़ी और अन्य विषय).

4. टाइम मैनेजमेंटः किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में सफलता के लिए ज़रूरी है टाइम मैनजेमेंट यानी समय प्रबंधन. जैसा कि कहा जाता है- ङ्गसमय उन्हीं लोगों को कम पड़ता है, जो उसे बर्बाद करते हैं.फ इसलिए ज़रूरी है कि अपने विषयों की व्यापकता देखते हुए सभी विषयों और तथ्यों को आत्मसात करने के लिए एक बेहतरीन टाइम टेबल बनाना, जिसे आप हर हाल में फॉलो करें. लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं है कि हर समय आप पढ़ते ही रहें. कुछ समय मनोरंजन के लिए भी निकालें, जो आपका मन तरोताज़ा करे और आपको फिर उतनी ही चुस्ती-फुर्ती के साथ विषयों को पढ़ने के लिए प्रेरित कर सके.

5. बुनियादी जानकारीः बेसिक नॉलेज का होना. किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए ज़रूरी है कि उससे संबंधित विषयों पर आपकी बुनियादी जानकारी पूरी तरह स्पष्ट हो. कहीं नाममात्र की भी समस्या न हो, क्योंकि मज़बूत बुनियाद ही मज़बूत इमारत खड़ी करती है.

6. सही सिलेक्शनः ये एक आवश्यक पहलू है कि जिस परीक्षा की तैयारी आप कर रहे हैं, क्या आपने उसके लिए सही स्टडी-मटेरियल चुना है, क्योंकि कई बार ऐसा देखा गया है कि जिस विषय में आपका रुझान नहीं होता, उस विषय को आप चुन तो लेते हैं, पर उसे पढ़ते समय आप उतनी लगन से पढ़ नहीं पाते, जितनी लगन की आवश्यकता होती है.

7. एक्सपर्ट की सलाहः सही स्टडी मटेरियल के लिए हमें समय-समय पर एक्सपर्ट यानी विशेषज्ञों की राय लेनी चाहिए. इससे सही मार्गदर्शन के साथ ही हमें अपना पुनर्मूल्यांकन करने का अवसर भी मिलता है.

8. सामूहिक तैयारीः ग्रुप स्टडी या सामूहिक तैयारी, वो प्रतियोगी जो आपकी ही तरह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में संलग्न हैं. उनका समूह आपके ज्ञान को और भी समृद्ध करता है, साथ ही स्वयं की क्षमता का आंकलन भी होता है. इसका सबसे बड़ा लाभ होता है कि आप एक-दूसरे से अपने विचारों, प्रश्‍नों और जानकारियों का अदान-प्रदान कर पाते हैं, जिसके परिणमस्वरूप आपकी तैयारी और सुदृढ़ होती जाती है.

9. मॉक टेस्टः एक तरह की बनावटी परीक्षा, आप कितने पानी में हैं और आपकी तैयारी कितनी अच्छी हुई है, इसकी जानकारी के लिए एक कारगर परीक्षा. यानी आप कह सकते हैं कि इसमें एग़्जाम के पहले एग़्जाम में सम्मिलित होने का अवसर मिलता है, जिसमें पिछले साल के प्रश्‍न-पत्र को तो हल करते हैं, साथ में समय का भी ध्यान रखते हैं. यूं कहें कि अपने एग़्जाम टेम्प्रामेंट को भी विकसित करते हैं. यह हमारी तैयारी का सबसे अहम् हिस्सा होता है, जो हमें परीक्षा से पूर्व ही बता देता है कि हम कितने सफल होंगे.

10. असफलता से सीखः अब अंतिम बात कि असफलता कभी भी सफ़र का अंत नहीं है, वो एक पड़ाव है. हमारी असफलता हमें बहुत-सी अच्छी सीख देकर जाती है, बस ज़रूरी है उसे सकारात्मक रूप से लेना और बिना हतोत्साहित हुए नई सीख के साथ उठ खड़े होना अपने निर्धारित लक्ष्य की ओर. सफलता निश्‍चित रूप से आपके क़दमों में होगी.

प्रतियोगी परीक्षा में क़ामयाब हुए एक्सपर्ट लोगों की उपयोगी सलाह-

* बनारस के गोविंद जयसवाल (आईएएस) का कहना है, ङ्गङ्घइस दुनिया में कोई भी विषय कठिन नहीं है, बस, आपके अंदर उसे क्रैक करने की विल पावर होनी चाहिए.

* आंध्र प्रदेश कैडर आईएएस श्‍वेेता मोहंती के अनुसार, ङ्गङ्घप्रतियोगी परीक्षाओं में सफल होने के लिए तीन बातें अहम् रहती हैं- परीक्षा को लेकर जुनून, समर्पण के साथ गंभीरता और कड़ी मेहनत, जो लोग ईमानदारी से कोशिश करते हैं, उनके दिलो-दिमाग़ में चौबीसों घंटे एग़्जाम की बातें ही रहती हैं. वैसे भी सक्सेस के लिए कोई शॉर्टकट नहीं होता है.फफ

* आईएएस दिव्यदर्शिनी का मानना है कि यदि आप आत्मविश्‍वास के साथ आगे बढ़ते हैं और ख़ुद पर विश्‍वास करते हैं, तो आप ज़रूर क़ामयाब होते हैं, यह उतना आसान नहीं है, लेकिन मुश्किल भी नहीं है. ईमानदारी से सही तरी़के से की गई कोशिशों के परिणाम भी अच्छे मिलते हैं.

सफलता के इन 10 सूत्रों का यदि आप सही ढंग से पालन करेंगे, तो आपको क़ामयाब होने से कोई नहीं रोक सकता. हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं.

Source - Meri Saheli 

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